अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में पूर्व कर्मचारी को उम्रकैद, कोर्ट ने हत्या और आर्म्स एक्ट में सुनाई सजा

अंबिकापुर के युवा कारोबारी अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने आरोपी को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया।

अक्षत अग्रवाल की 21 अगस्त 2024 को अंबिकापुर से लगे डिगमा इलाके में कार के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले में पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से तीन पिस्टल, 31 कारतूस, 50 हजार रुपए नकद और अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट व अंगूठी बरामद की गई थी।

दो साल चली सुनवाई, 33 गवाहों के बयान दर्ज

मामले में पुलिस ने घटना के अगले दिन ही संजीव मंडल को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया। सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारी और जवानों के अलावा मेडिकल व फॉरेंसिक अधिकारियों, परिजनों और दोस्तों समेत कुल 33 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अदालत ने परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। जांच में घटना के समय अक्षत अग्रवाल और संजीव मंडल की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि हुई थी।

आरोपी ने किया था अलग दावा

गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने पुलिस के सामने दावा किया था कि अक्षत अग्रवाल ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। आरोपी के मुताबिक, अक्षत खुद हथियार लेकर आया था और उसने उसे गोली मारने के लिए कहा था। आरोपी ने दावा किया था कि पहली गोली अक्षत ने खुद चलाई, जिसके बाद उसने दो गोलियां और चलाईं।

हालांकि, बाद में आरोपी अदालत में अपने पुलिस बयान से मुकर गया और खुद को निर्दोष बताया। जांच में यह भी सामने आया कि अक्षत को तीनों गोलियां नजदीक से मारी गई थीं।

अदालत ने संजीव मंडल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत पांच वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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