जंतर-मंतर हिंसा: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा-सादे कपड़ों में हमारे ही जवान थे

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़े में तैनात जवानों ने छात्रों पर जमकर कहर बरपाया था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. शुरुआत में सादे कपड़े में तैनात जवानों को लेकर दिल्ली पुलिस ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन अब बवाल के एक महीने बाद पुलिस ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है.
पुलिस ने कील वाली लाठियों के इस्तेमाल पर भी सफाई दी है. पुलिस का कहना है कि सिर्फ एक जगह पर इसका इस्तेमाल देखा गया. कील वाला डंडा प्रदर्शनकारियों के हाथ में ही था. शायद वे झंडा लगाकर इसमें लाए थे.
सादे कपड़े वाले जवानों ने जमकर बरसाए थे डंडे
प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़े में तैनात जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर डंडे बरसाए थे. दिल्ली पुलिस के मुताबिक इसके कारण करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे. वहीं करीब 250 पुलिस के जवान प्रदर्शन के दौरान घायल हुए. पुलिस का कहना है कि भीड़ को कंट्रोल करने के लिए लाठी चलाना गलत नहीं है.
सादे कपड़े में तैनात जवानों की शिकायत मानवाधिकार आयोग के पास हुई थी. इतना ही नहीं याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस मसले को उठाया था. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सादे कपड़े में तैनात जवानों ने ही माहौल को खराब किया.
सादे कपड़ों में पुलिस की तैनाती क्यों की जाती है?
1. खुफिया जानकारी जुटाना: प्रदर्शन या किसी बड़े समारोह के दौरान लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) या स्पेशल ब्रांच के जवान सादे कपड़ों में भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं ताकि कोई असामाजिक तत्व छिपकर हिंसा न भड़का सके.
2. माहौल को उग्र होने से बचाना: सादे कपड़े में तैनाती इसलिए की जाती है कि भीड़ में क्या हो रहा है और उसके आगे की रणनीति क्या है? इन जवानों का काम भीड़ को उग्र होने से बचाना है.











