बिलासपुर रेल हादसा…AILRSA ने कहा-लोको पायलट को दोषी ठहराना काल्पनिक:CRS को बताई सेफ्टी की समस्याएं, फैक्ट फाइंडिंग जांच के बाद पुनर्विचार की मांग

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए ट्रेन हादसे की रेलवे की जांच पर आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने सवाल उठाया है। पदाधिकारियों ने रेलवे की जांच और उसमें केवल रनिंग स्टाफ को काल्पनिक रूप से दोषी ठहराने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिना फैक्ट फाइंडिंग के जांच रिपोर्ट जारी करने को भी गलत बताया है।

एसोसिएशन ने शुक्रवार (7 नवंबर) को CRS के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही इस दौरान सेफ्टी से जुड़ी कई समस्याएं गिनाई। इस दौरान CRS ने करीब 40 मिनट तक वन-टू-वन चर्चा की। साथ ही उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने कहा है।

दरअसल, बिलासपुर रेलवे स्टेशन के आउटर में गतौरा-लालखदान के बीच हुए रेल हादसे की जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी, जिसमें पांच सदस्य शामिल थे। कमेटी में अलग-अलग विभागों के अफसरों को शामिल किया था।

कमेटी ने प्रारंभिक जांच कर रेलवे को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें बताया गया कि हादसे की मुख्य वजह लोको पायलट के सिग्नल ओवरशूट करना था। यानी कि लोको पायलट विद्या सागर को हादसे के लिए दोषी बताया गया। इसके साथ ही कई बिंदुओं पर रिपोर्ट दी गई है।

रिपोर्ट को काल्पनिक बताकर AILRSA ने जताया विरोध

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के जोनल महासचिव ने वीके तिवारी ने वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता(ऑपरेशन) को एक पत्र लिखकर आपत्ति जताई है।

इसमें कहा गया है कि बिलासपुर जोन के गतौरा-बिलासपुर सेक्शन में 4 नवंबर को हुए रेल हादसे पर केस स्टडी रिपोर्ट संख्या 18/2025 जारी की गई है, जिस पर एसोसिएशन की आपत्ति है।

संगठन का आरोप है कि रिपोर्ट में सिग्नल नंबर की गलत जानकारी दी गई है। साथ ही बिना फैक्ट फाइंडिंग जांच के रिपोर्ट जारी करना गलत है। बिना जांच के रिपोर्ट में रनिंग स्टाफ को दोषी ठहराना अनुचित है। ऐसा करना रनिंग स्टाफ की छवि को धूमिल करता है।

रिपोर्ट पर पुनर्विचार की मांग

संगठन ने SECR बिलासपुर प्रशासन से मांग की है कि रिपोर्ट पर पुनर्विचार किया जाए और फैक्ट फाइंडिंग जांच के बाद ही निष्कर्ष जारी किया जाए। इसी सिलसिले में एसोसिएशन ने शुक्रवार को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (अलारसा) के दो पदाधिकारियों ने भी CRS बीके मिश्रा से मुलाकात की। उनके नाम सूची में शामिल नहीं थे।

जैसे ही वे पहुंचे, बीके मिश्रा ने पूछा कि क्या दुर्घटना से संबंधित कोई जानकारी देना चाहते हैं। इस पर पदाधिकारियों ने कहा कि घटना से संबंधित तो नहीं, लेकिन सेफ्टी से जुड़ी कई समस्याएं हैं। इसके बाद सीआरएस ने लगभग 40 मिनट तक अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की और उन्हें आज यानी शनिवार को दस्तावेजी सबूतों के साथ दोबारा बुलाया।

मालगाड़ी के मैनेजर ने दर्ज कराया बयान

शुक्रवार को CRS के सामने पहुंचे मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेष चंद्र से पूछा गया कि उन्होंने मेमू को किस दूरी से देखा और उसकी रफ्तार कितनी रही होगी। क्या मेमू चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया था, मेमू की स्थिति कैसी थी और क्या उस ट्रैक पर मेमू आने की कोई सूचना थी।

जिन्होंने की काउंसलिंग, उनका लिया बयान

जांच के दौरान CRS ने लोको पायलट विद्यासागर की काउंसलिंग करने वाले सीएलआई एसके दास और असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज की काउंसलिंग करने वाले सीएलआई सीएस मौर्या से पूछताछ की गई। उनसे पूछा गया कि पिछली काउंसलिंग कब हुई थी, महीने में कितनी बार काउंसलिंग होती है और काउंसलिंग किस तरीके से की जाती है।

इसके अलावा पांच सदस्यीय जांच दल के एसएसई सी एंड डब्ल्यू इंदिरा मोहन, सीएलआई एसके आचार्या, एसएसई पी.वाय. जेपी राठौर, एसएसई सिग्नल जेके चौधरी और सीडीटी एके अज्ञने से भी तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई।

21 अधिकारी-कर्मचारियों ने दर्ज कराया बयान, असिस्टेंट लोको पायलट से नहीं हो पाई पूछताछ

CRS बीके मिश्रा ने शुक्रवार को 21 लोगों के बयान दर्ज किए। 29 लोगों में से असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज को छोड़कर शेष 28 लोगों के बयान हो चुके हैं। असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज फिलहाल बयान देने की स्थिति में नहीं बताई जा रही हैं।

शुक्रवार की जांच में मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेष चंद्र का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच देर रात तक चलती रही और इस दौरान लोको पायलट के साइको टेस्ट फेल होने का मुद्दा भी सामने आया, जिस पर काफी देर पूछताछ की गई।

अलारसा के पदाधिकारी भी पहुंचे

जांच के दौरान ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (अलारसा) के दो पदाधिकारियों ने भी सीआरएस बीके मिश्रा से मुलाकात की। उनके नाम सूची में शामिल नहीं थे। जैसे ही वे पहुंचे, बीके मिश्रा ने पूछा कि क्या दुर्घटना से संबंधित कोई जानकारी देना चाहते हैं।

इस पर पदाधिकारियों ने कहा कि घटना से संबंधित तो नहीं, लेकिन सेफ्टी से जुड़ी कई समस्याएं हैं। इसके बाद सीआरएस ने लगभग 40 मिनट तक अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की और उन्हें आज शनिवार को दस्तावेजी सबूतों के साथ दोबारा बुलाया।

आज होंगे रेल अफसरों के बयान

शनिवार को प्रथम सत्र में जांच जारी रहेगी, जिसमें जोन और डिवीजन के अफसरों से लोको पायलट के साइको टेस्ट मामले में सवाल किए जा सकते हैं। फिलहाल अधिकांश तथ्यों की जांच पूरी हो चुकी है। सीआरएस दोपहर बाद यहां से कोलकाता के लिए रवाना होंगे। अफसरों से पूछताछ से पहले वे अन्य संबंधित लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

इधर, डीआरएम ने लिया मेमू का ब्रेकिंग टेस्ट

दूसरी तरफ लाल खदान में मेमू लोकल ने जिस स्पीड से मालगाड़ी के ब्रेकयान को टक्कर मारी थी उसी स्पीड पर दोबारा ट्रेन चलवाकर डीआरएम खोईवाल ने शुक्रवार को मेमू लोकल को गतौरा रेलवे स्टेशन उसी स्पीड में चलवाकर उसका ब्रेक टेस्ट किया। अलग-अलग सेक्शन और अलग-अलग स्पीड में ब्रेक मारकर ट्रायल किया गया।

डीआरएम सहित सहित अन्य अफसरों ने मेमू का ब्रेक ट्रायल लिया। दुर्घटना के सभी एंगलों को तलाशा जा रहा है। शाम 5 बजे मेमू की खाली रैक में अफसरों और अन्य रेलकर्मियों को लेकर गतौरा के लिए रवाना हुए।

दुर्घटनाग्रस्त मेमू की जो स्पीड गतौरा रेलवे स्टेशन से छूटने के समय थी और उसके बाद सिग्नल पार करने के बाद जो स्पीड थी। और जितनी स्पीड से ट्रेन ने टक्कर मारी उन सभी स्पीड पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर मेमू की ब्रेक का ट्रायल ​लिया गया।

देर से लगाया एमरजेंसी ब्रेक

बिलासपुर से जाते और लौटते समय भी यह किया गया। दुर्घटनाग्रस्त मेमू ने गतौरा रेलवे स्टेशन से छूटने के फौरन बाद 45 की स्पीड पकड़ी थी। जब सिग्नल पार किया तब उसकी स्पीड 76 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मेमू के लोको पायलट ने दुर्घटना का अंदेशा होने पर दुर्घटना से कुछ सेकेंड पहले इमरजेंसी ब्रेक लगाया था तब उसकी स्पीड कम होकर 53 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई थी। डाटा लॉगर में रिकॉर्ड टाइमिंग और स्पीड के हिसाब से मेमू के ब्रेक की ​टेस्टिंग की गई।