म्यूल अकाउंट मामलों में सख्त हुई अदालतें: साइबर फ्रॉड केस के 475 आरोपी दो साल से जेल में बंद

म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर फ्रॉड मामलों में गिरफ्तार 475 आरोपियों को अब तक अदालतों से राहत नहीं मिल सकी है। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी हैं। अदालतों की सख्ती के बाद साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी सख्ती
एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराधों को गंभीर बताते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हत्या जैसे अपराध में सुधार की संभावना हो सकती है, लेकिन साइबर ठगी करने वालों को आसानी से नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
इसके बाद निचली अदालतों में भी ऐसे मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। साइबर पुलिस के अनुसार, मार्च 2024 से म्यूल अकाउंट और फर्जी सिम के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान कई खाताधारकों, सिम सप्लायरों और बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
10 से 25 हजार रुपए में बेचे गए बैंक खाते
जांच में सामने आया है कि कई लोगों ने अपने बैंक खाते 10 से 25 हजार रुपए में साइबर ठगों को बेच दिए थे। कुछ आरोपी हर महीने कमीशन भी ले रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
रायपुर में करीब 3000 ऐसे खातों की पहचान की गई, जिनमें साइबर फ्रॉड की रकम जमा कराई गई। पुलिस के मुताबिक, फल-सब्जी और दूध बेचने वाले लोगों के नाम पर खाते खोलकर उनमें करोड़ों रुपए का लेनदेन किया जा रहा था।
फर्जी सिम और खातों पर कार्रवाई जारी
पुलिस ने म्यूल अकाउंट के लिए फर्जी सिम बेचने के आरोप में एक मोबाइल दुकानदार को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने कई लोगों के नाम पर सिम कार्ड जारी कर साइबर ठगों को उपलब्ध कराए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि म्यूल अकाउंट पर प्रभावी रोक लगाई जाए तो साइबर फ्रॉड के अधिकांश मामलों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। पुलिस और अदालतों की सख्ती के बाद अब ऐसे मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल रही है।











