बोधघाट परियोजना पर फिर तेज हुई हलचल: 49 हजार करोड़ के डैम के लिए 56 गांवों पर विस्थापन का खतरा

बस्तर में वर्षों से लंबित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित इस परियोजना के लिए सर्वे कार्य शुरू होते ही प्रभावित गांवों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों ने जमीन और विस्थापन को लेकर चिंता जताई है।

45 साल बाद फिर शुरू हुआ सर्वे कार्य

बोधघाट परियोजना को पहली बार वर्ष 1979 में मंजूरी मिली थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन था, लेकिन अब इसे बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में दिल्ली की वेपकोस लिमिटेड द्वारा नए सिरे से सर्वे किया जा रहा है, जिसे अगले तीन महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के आधार पर नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत अब बढ़कर करीब 49 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार इस योजना को बस्तर क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।

56 गांवों पर विस्थापन का संकट

परियोजना के निर्माण से इंद्रावती नदी किनारे बसे कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डैम निर्माण के कारण दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे अपनी जमीन और जल-जंगल को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे।

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के सैकड़ों गांवों को सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना है। प्रशासन का दावा है कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को सालभर पानी उपलब्ध हो सकेगा।

परियोजना के इतिहास से जुड़ा विवाद

बोधघाट परियोजना वर्षों से पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दों के कारण विवादों में रही है। वर्ष 1984 में इस योजना के लिए वर्ल्ड बैंक से ऋण स्वीकृत हुआ था, लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों और आदिवासी विरोध के चलते बाद में काम रोक दिया गया।

अब सरकार इसे नए स्वरूप में लागू करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, परियोजना के दोबारा शुरू होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में विरोध और आंदोलन की संभावनाएं भी तेज हो गई हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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