Supreme court decision: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण और बकाया वेतन

Supreme court decision।नई दिल्ली। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
Supreme court decision।अदालत ने स्पष्ट किया कि एक ही प्रतिष्ठान में स्थायी कार्य कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित करना उनके साथ सीधा भेदभाव है।
कोर्ट ने कहा कि जब समान पदों पर कार्यरत नियमित कर्मचारियों को सभी लाभ दिए जा रहे हैं, तो दैनिक वेतनभोगियों को इनसे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन है।
यह मामला उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से जुड़ा था, जहां छह दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी—जिनमें पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और एक चालक शामिल थे—1989 से 1992 तक सेवा दे रहे थे।
दशकों की सेवा के बावजूद राज्य सरकार ने वित्तीय बाधाओं और नई भर्ती पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए उनकी नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी थी। कर्मचारियों ने इसे भेदभाव बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार और शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं का तत्काल नियमितीकरण किया जाए।
साथ ही 2002 से अब तक का पूरा बकाया वेतन, सेवा निरंतरता और सभी परिणामी लाभों का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां रिक्त पद उपलब्ध नहीं हैं, वहां अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमितीकरण के बाद किसी भी कर्मचारी को नियमित वेतनमान से कम पर नहीं रखा जाएगा।
यदि अंतिम वेतन अधिक है तो उसे संरक्षण मिलेगा और आगे की वेतन वृद्धि भी वेतन ग्रेड के अनुसार दी जाएगी। वरिष्ठता और पदोन्नति के लिए सेवा की गणना नियमितीकरण की तिथि से की जाएगी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नियुक्ति में निष्पक्षता और प्रशासन में पारदर्शिता सरकार की कृपा नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।
यह फैसला न केवल याचिकाकर्ताओं के लिए, बल्कि देशभर में वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे लाखों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।










