भिलाई सीमेंट फैक्ट्री केस में इंजीनियर बाइज्जत-बरी, कोर्ट ने माना—हादसे में मौत, हत्या नहीं

छत्तीसगढ़ के भिलाई की एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में कोल हैंडलिंग प्लांट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) आर. बालाराजू की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार इंजीनियर संजय तिवारी को कोर्ट ने निर्दोष करार दिया है। पुलिस ने उन्हें हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह हत्या नहीं, बल्कि एक हादसा था। करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद संजय तिवारी को बाइज्जत-बरी किया गया।
यह मामला जून 2024 का है, जब सीमेंट फैक्ट्री में आर. बालाराजू की लाश खून से लथपथ हालत में मिली थी। पुलिस ने मैकेनिकल इंजीनियर और कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) इंचार्ज संजय तिवारी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। आरोप था कि दोनों के बीच विवाद हुआ था और तिवारी के कपड़ों पर खून के निशान पाए गए। हालांकि कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष हत्या साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
जांच में सामने आया कि बालाराजू की मौत सिर पर लगी चोट और अधिक रक्तस्राव से हुई थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह भी दर्ज था कि ऐसी चोट ऊंचाई से गिरने पर भी आ सकती है। हेलमेट पर कोई क्षति नहीं पाई गई, जबकि पुलिस का दावा था कि हत्या हथौड़े से की गई थी। वहीं, हथौड़े पर भी खून के कोई निशान नहीं मिले।
डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स ने संजय तिवारी के निर्दोष होने की पुष्टि की। घटना के समय वे फोन पर बात कर रहे थे और वारदात के बाद ही घटनास्थल पर पहुंचे थे। कोर्ट ने इन्हीं आधारों पर उन्हें बरी कर दिया। इस दौरान संजय तिवारी 4 जून 2024 से 13 फरवरी 2025 तक जेल में रहे।
संजय ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा—“मुझे शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने न्याय दिया, लेकिन इन आठ महीनों में सब कुछ बदल गया। नौकरी चली गई, समाज ने ठुकरा दिया और पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया।”
इस फैसले ने एक बार फिर पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने माना कि पुलिस बिना पर्याप्त सबूतों के कार्रवाई कर रही थी, जबकि घटना असल में एक औद्योगिक दुर्घटना थी।









